ऐसे पड़ी थी माइक्रोसॉफ्ट की नींव, जानिए कुछ मजेदार बातें

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मल्टीमीडिया डेस्क। माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम आज के वक्त में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम्स हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनियाभर में मशहूर यह कंपनी बनी कैसे थी। 2016 तक माइक्रोसॉफ्ट दुनिया की सबसे ज्यादा सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी थी।

इसकी स्थापना से लेकर अब तक इसने कई मुकाम हासिल किए। आज दुनियाभर में करीब 1.7 बिलियन लोग हर रोज विंडोज उपयोग करते हैं और 1.2 बिलियन लोग माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस यूज करते हैं। मतलब हर सात लोगों में से एक इसका उपयोग कर रहा है। वहीं आउटलुक के 400 मिलियन एक्टिव यूजर्स हैं।

ऐसा रहा दो दोस्तों का सफर

आज इतने बड़े बाजार पर राज करने वाली इस कंपनी की शुरुआत बचपन के दो दोस्तों ने की थी। बिल गेट्स और पॉल एलन, यही वो दो दोस्त थे जिन्होंने इस कंपनी की स्थापना की। इससे पहले 1972 में दोनों दोस्तों ने अपनी पहली कंपनी ट्रैफ-ओ-डाटा बनाई जिसमें उन्होंने मौलिक कम्प्यूटर बनाया जो ऑटोमोबाइल ट्रैफिक डाटा को ट्रैक एनालाइज करता था।

इसके बाद बिल गेट्स हार्वर्ड में भर्ती हो गए लेकिन 1975 में उन्होंने एक अल्टैयर 8800 माइक्रो कम्प्यूटर के बारे में पढ़ा और उसके लिए बेसिक इंटरप्रीटर बनाया। यह इंटरप्रीटर लेकर यह दोनों माइक्रो इंस्ट्रूमेंटेशन एंड टेलीमेंट्री सिस्टम्स (एमआईटीएस) गए जहां उनके प्रोग्रामर को मंजूरी मिल गई और एलन उसके लिए काम करने लगे। बिल गेट्स ने भी कॉलेज से छुट्टी ले ली और अपने दोस्त के पास पहुंच गए। आखिरकार 4 अप्रैल 1975 को दोनों ने एमआईटीएस से अलग होकर अपनी कंपनी बनाई जिसे उन्होंने माइक्रो-सॉफ्ट नाम दिया।

MS-DOS ने बनाई बड़ा ब्रांड

80 के दशक में माइक्रोसॉफ्ट ने सॉफ्टवेयर बिजनेस में कदम रखा और झेनिक्स नाम का अपना यूनिक्स पेस किया। लेकिन इस सब के बावजूद एमएस डॉस ऐसी चीज थी जिसने माइक्रोसॉफ्ट को बड़ी पहचान दी। 1979 में यह कंपनी वाशिंगटन शिफ्ट हो गई और देखते ही देखते मल्टीनेशनल कंपनी में बदल गई। 1980 में आईबीएम ने माइक्रोसॉफ्ट को अपने नए कम्प्यूटर्स के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने का कॉन्ट्रेक्ट दिया जिसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने एमएस-डॉस बनाया। इसके बाद उनकी कंपनी तेजी से आगे बढ़ी। 1985 में माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज का पहला ऑपरेटिंग सिस्टम पेश किया। 1986 में स्टॉक मेकिंग के नतीजे आए तो 31 साल के बिल गेट्स दुनिया के सबसे युवा अरबपति बन चुके थे।

1995 में जब दुनिया में पर्सनल कम्प्यूटर्स की मांग तेजी से बढ़ी तो माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज 95 ऑपरेटिंग सिस्टम पेश किया जो सालों तक मार्केट में राज करता रहा। इस ऑपरेटिंग सिस्टम की 7 मिलियन कॉपिज इसके जारी होने के पहले हफ्ते में ही बिक गई थीं।

माइक्रोसॉफ्ट की मजेदार अनजानी बातें

इस सफर में कई ऐसी चीजें हुईं जो ना कि इतिहास बन गईं बल्कि इतिहास रचा भी। इनमें माइक्रोसॉफ्ट का वो वॉलपेपर और स्टार्टिंग साउंड भी है जो दुनियाभर में मशहूर हुआ। लेकिन क्या आप जानते हैं कि विंडोज का वो हरे मैदान और नीले आसमान वाला मशहूर वॉलपेपर किसकी देन थी।

दरअसल, वास्तव में यह एक फोटोग्राफ है जिसे वॉलपेपर बना दिया गया। यह फोटो नेशनल जियोग्राफिक के फोटोग्राफर चार्ल्स ओ रीयर ने कैलिफोर्निया के सोनोमा काउंटी में 1996 में खींचा था। इस समय वो अपनी गर्लफ्रैंड से मिलने गए थे। चार्ल्स ने इसे पहले कॉर्बिज को भेजा था लेकिन माइक्रोसॉफ्ट ने इसके अधिकार सन् 2000 में खरीद लिए।

ऐसा ही विंडोज कम्प्यूटर के स्टार्टिंग साउंड को बनाने वाले थे ब्रायन इनो ने कंपोज किया था। यह साउंड विंडोज 95 में यूज किया गया जो आज भी मशहूर है। यू2 और डेविड बोवी जैसे कलाकारों के साथ काम कर चुके ब्रायन को इस तरह के छोटे म्यूजिक बनाना पसंद था। इसका रोलिंग स्टोन्स के स्टार्ट अप मी से गहरा संबंध था क्योंकि यह विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम का ऑफिशियल थीम सॉन्ग था।

माइक्रोसॉफ्ट की सबसे धमाकेदार पहली ऐप थी माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल। इसने लोगों के काम करने के तरीके को बदल दिया। वहीं इसका पहला लोगो बिल गेट्स और एलन ने एक दिन में बना दिया था। यह लोगो माइक्रो और सॉफ्ट से मिलकर बना था जिसके बीच में लिखे ओ को ब्लिबेट कहा जाता है।

कंपनी अपने कर्मचारियों को फ्री ड्रिंक ऑफर करती है और इसके कॉर्पोरेट कैंपस में हर साल 23 मिलियन ड्रिंक्स फ्री में दिए जाते हैं। माइक्रोसॉफ्ट में 35 कैफेटेरिया हैं जो हर रोज 37 हजार लोगों को सर्व करते हैं।

माइक्रोसॉफ्ट में दूसरी कंपनियों की तरह कई परंपराएं हैं और इनमें से एक है अपने काम की वर्षगांठ पर कैंडीज लाना। इनमें भी एम एंड एम कैंडी सबसे ज्यादा पसंद की जाती है। हर कर्मचारी को अपने काम की हर वर्षगांठ को जोड़कर एक पाउंड एम एंड एम कैंडी लानी होती है। मसलन अगर बिल गेट्स ऐसा करते तो उन्हें हर साल की एक पाउंड एम एंड एम के हिसाब से 33 पाउंड एम एंड एम लानी पड़ती।

ऐसा काहा जाता है कि माइक्रोसॉफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों को सॉफ्टी पुकारे जाते हैं और जो यहां परमानेंट रूप से काम नहीं करते उनके ईमेल एड्रेस में यूज होने वाले ‘@’ के आगे डैश ‘-@’ का निशान लगाया जाता है। इन कर्मचारियों को परमानेंट कर्माचरी डैश ट्रैश कहकर पुकारते हैं।

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