किसानों की आय दोगुना करने की कवायद, इंदौर में बनेगा उद्यानिकी गलियारा

India_Farmingभोपाल (ब्यूरो)। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुना करने का रोडमैप तैयार कर लिया है। सीहोर के शेरपुर में किसान महासम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका संकल्प जताया था। प्रदेश के हर जिले में फल और सब्जियों की सुसज्जिात मंडियां अलग से बनेंगी। कुल 50 कृषि उपज मंडी को नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट के रूप में तैयार किया जाएगा। भोपाल-इंदौर में उद्यानिकी गलियारा विकसित किया जाएगा।

रोड मैप के अनुसार वर्ष 2017 तक सभी किसान को मृदा स्वास्थ कार्ड दिए जाएंगे। कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के नए कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। शरबती, लाल चना, पिपरिया तुअर, काली मूछ, जीराशंकर और चिन्नैर धान का जीआई हासिल किया जाएगा। संकर धान के बीजों की पैदावार के लिए धान उत्पादक जिलों में किसानों का प्रशिक्षण कार्यक्रम अभियान के तौर पर चलाया जाएगा।

मुख्यमंत्री किसान विदेश अध्ययन यात्रा में 1000 किसान को हर साल विदेशों में उन्नत कृषि क्षेत्र के भ्रमण के लिए भेजा जाएगा। फ्रूट एवं वेजीटेबल रूट किसानों को खेती के अलावा वैकल्पिक आय के स्रोत विकसित करने 23 हजार ग्राम पंचायत में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए युवा उद्यमियों को स्थापित किया जाएगा।

मिल्क रूट की तरह फ्रूट रूट और वेजीटेबल रूट बनाकर संस्थागत व्यवस्था की जाएगी। क्लस्टर में एग्री बिजनेस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसमें फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के प्रोत्साहन की सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। कुल 50 कृषि उपज मंडी को नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट के रूप में तैयार किया जाएगा।

14 घंटे बिजली

लघु एवं सीमांत किसानों को अधिक उत्पादन देने वाली संकर धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर और सरसों के बीज पर अनुदान देने की योजना शुरू की जाएगी। खेती के लिए स्थायी कनेक्शन देने के लिए अभियान चलेगा। कृषि क्षेत्र को बिजली की न्यूनतम 14 घंटे की आपूर्ति तय की जाएगी। सात लाख अस्थायी कनेक्शन को स्थायी किए जाने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जाएगा।

रोड मैप की खास बातें

रतलाम, झाबुआ, जबलपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और छतरपुर के आसपास उद्यानिकी समूह विकसित किए जाएंगे। -उद्यानिकी और फूलों की खेती सहित प्रसंस्करित और गैर प्रसंस्कृत उत्पादों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए इंदौर और भोपाल में हवाई कार्गो लॉजिस्टिक इकाइयां विकसित की जाएंगी।

मप्र के प्रस्तावित रोडमैप के अनुसार कृषि वानिकी नीति बनाने गुड़, पनीर आदि के कुटीर उद्योग स्थापित करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। होशंगाबाद जिले के पवारखेड़ा में पीपीपी मोड में 3000 टीईयू प्रतिमाह क्षमता वाले लॉजिस्टिक हब बनेगा। रतलाम, देवास, बुरहानपुर, बीना, जबलपुर और कटनी में भी भंडारण और लॉजिस्टिक हब का विकास किया जाएगा।

Comments are closed.