फाइनेंस मिनिस्टर नहीं हूं, जो बता दूं कि मुआवजा कब बंटेगा : सिंधिया

mp-vidhansabhaभोपाल। ‘पीथमपुर ऑटो टेस्टिंग ट्रैक का प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण है। इसके पूरा होने से इंदौर की इकॉनामी में बदलाव तो आएगा, साथ ही दुनिया का तीसरा ट्रैक भी हमारे पास होगा। किसानों को मुआवजा देने की चिंता सरकार को है, इस दिशा में काम भी हो रहा है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप हमें परेशान करें। मैं फाईनेंस मिनिस्टर नहीं हूं, जो बता सकूं कि मुआवजा कब बंटेगा।”

ये बात मंगलवार को विधानसभा में उद्योग मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कही। वह कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी की ध्यानाकर्षण सूचना का जवाब दे रहीं थीं। इससे असंतुष्ट कांग्रेस विधायक दल ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। विधायक पटवारी ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा था कि पीथमपुर में ऑटो टेस्टिंग ट्रेक के लिए किसानों की 1 हजार 80 एकड़ सिंचित भूमि अधिग्रहीत हुई, लेकिन आठ साल बाद भी उन्हें मुआवजा नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2015 में चार माह में किसानों को भुगतान का आदेश दिया, लेकिन फिर भी राशि नहीं दी गई, बल्कि 22 फरवरी को सागौर में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने लाठियां भांजी और आंसू गैस छोड़ी। इस पर मंत्री सिंधिया ने कहा कि केंद्र ने ऑटो टेस्टिंग ट्रैक के लिए 450 करोड़ की परियोजना में प्रदेश सरकार को निशुल्क जमीन देने को कहा था। इसमें 2009 तक 1405.492 हेक्टेयर जमीन का कब्जा लेकर नेट्रिप को सौंपा था। गांवो में जमीनों के अलग-अलग भाव होने से किसानों में असंतोष था। 111 करोड़ रुपए अवार्ड पारित करने के साथ ही 21 करोड़ 18 लाख रुपए का पुनर्वास पैकेज घोषित हुआ, लेकिन इससे असंतुष्ट होकर किसान कोर्ट चले गए। कोर्ट ने 632 करोड़ रुपए मुआवजा राशि देने को कहा, तो सरकार ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने भी दो हजार करोड़ से अधिक मुआवजा राशि देने के आदेश दिए। इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने असिंचित जमीन के लिए 45 लाख और सिंचित जमीन के लिए 60 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजे की रकम मय ब्याज चार माह में देने के निर्देश दिए थे। सरकार ने राशि का इंतजाम कर 494 करोड़ से अधिक की राशि कलेक्टर धार को दी है, जो किसानों को दी गई। इससे पहले 347 करोड़ से अध्ािक राशि का भुगतान हुआ है। बजट में भी मुआवजे के लिए 800 करोड़ रुपए का प्रावध्ाान हुआ है, वहीं 400 करोड़ रुपए की आवश्यकता पूरी करने के लिए चतुर्थ अनुपूरक में राशि स्वीकृत करने की मांग की गई है।

अब फिर एक साल का इंतजार…

विध्ाायक जीतू पटवारी- अब 800 करोड़ के लिए फिर एक साल का इंतजार करना पड़ेगा। किसके आदेश पर किसानों पर लाठीचार्ज हुआ, केस दर्ज हुए।

मंत्री सिंध्ािया-मैं नकारात्मक जवाब देना नहीं चाहती कि कौन उनके साथ पहले से था और कौन बाद में गया। मैंने जब से उद्योग मंत्रालय से संभाला है तब से योजना पटरी पर आ रही है। दो साल में 7-8 बार भारी उद्योग मंत्रालय से बात की है। योजना का पहला चरण 2016 में और दूसरा 2018 तक पूरा हो जाएगा। हम रकम जुटा रहे हंै और यह स्वीकार भी कर रहे हैं कि हमें समय सीमा में मुआवजा देना था। हमें भी फायदा जल्दी मुआवजा देने में ही है। ट्रेक तैयार हो जाएगा तो आपके इलाके की इकॉनामी का गेम चेंजर साबित होगा।

विध्ाायक जीतू पटवारी- सरकार का जवाब गलत है कि कलेक्टर से उन्हें मांग पत्र नहीं मिला है। मैने आरटीआई के तहत जानकारी निकाली है जिसमें कलेक्टर ध्ाार काफी पहले सरकार को मुआवजे से संबध्ाित मांगपत्र भेज चुके हैं।

मंत्री सिंध्ािया-हमने आपसे आठ दिन पहले ही कहा था कि आपके पास जानकारी है तो दें दे।

विध्ाायक डॉ.गोविंद सिंह- अगले वित्तवर्ष के बजाय इसी अनुपूरक में शेष राशि का प्रावध्ाान किया जाए। और यह भी बताएं कि लाठीचार्ज किसकी अनुमति से हुआ था।

मंत्री सिंध्ािया-आप हमें परेशान कर रहे ह। हम वित्त विभाग को केवल मांग बता सकते हंै। हमें भी पता है कि देरी से हम कोर्ट के कंटेम्प्ट की ओर जा रहे हैं। मैं खुद किसानों से दो-तीन बार जाकर मिली हूं। हमें भी उनकी चिंता है।

विधायक डॉ.गोविंद सिंह- मंत्री वचन दें कि किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस होंगे।

मंत्री सिंधिया- वचन नहीं दे सकूंगी। पर इसका परीक्षण करवा लेंगे।

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