विद्यार्थियों को आत्महत्या से बचाने के लिए बनी विधानसभा की समिति

exam_tensionभोपाल। स्कूल प्रबंधन और पालाकों के परीक्षा में अच्छे नंबर लाने के दबाव से इन दिनों बच्चों द्वारा की जा रही आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए विधानसभा की समिति देश-विदेश के विषय विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर अनुशंसाएं करेगी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सदन की समिति बनाने की मंशा पर इसका ऐलान किया। यह मामला सदन में कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत और आरिफ अकील द्वारा ध्यान आकर्षण सूचना में पढ़ने वाले बच्चों द्वारा परीक्षा के दबाव के कारण की जा रही आत्महत्याओं को लेकर उठाया गया था।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ध्यान आकर्षण सूचना का जवाब देते हुए कहा कि आज अच्छे नंबर की होड़ लगी है । स्कूल प्रबंधन से लेकर अभिभावक तक बच्चों के पीछे लगे रहते हैं।

उन्होंने महात्मा गांधी, अब्दुल कलाम, थामस एडिशन, अल्बर्ट आइंसटाइन, सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए कहा कि ये सभी पढ़ाई में बहुत अच्छे नहीं थे। इसलिए अच्छे नंबर लाना कोई सफलता का मापदंड नहीं है। प्रायवेट स्कूल बच्चों पर अच्छे नंबर लाने के लिए दबाव बनाते हैं।

भोपाल के डीपीएस स्कूल के छात्र आदित्य मान सिंह के बारे में कहा कि वह अच्छा संगीतज्ञ बन सकता था लेकिन अंकों की होड़ के कारण उसने आत्महत्या कर ली। बच्चों की आत्महत्या की घटनाओं के बाद लगता है कि स्कूलों में काउंसिलिंग के लिए शिक्षक की अनिवार्यता करनी पड़ेगी।

मुख्यमंत्री ने स्कूलों में नैतिक शिक्षा, महापुरुषों की जीवनी, योग की परीक्षा की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों को तनावरहित माहौल देने का प्रयास किया जाएगा। खेल के पीरियड स्कूलों में गायब हो गए हैं जबकि इन पीरियड से बच्चे तनाव मुक्त होते थे।

उन्होंने कहा कि बच्चों को आजकल कोटा भेजने की होड़ लगी रहती है। करियर बनाने के नाम पर प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में कामयाबी को मापदंड मान लिया गया है जबकि वोकेशनल कोर्स की शिक्षा से भी अच्छा करियर बनाया जा सकता है। अच्छा काम, धंधा और रोजगार हासिल किया जा सकता है।

भोपाल के आदित्य मान सिंह से लेकर प्रदेश के कई हिस्सों में हाल ही में हुई पढ़ने जाने वाले बच्चों की खुदकुशी की घटनाओं के उदाहरण पेश करते हुए रावत ने चिंता जताई और कहा कि कहीं न कहीं हमारे द्वारा कोई चूक की जा रही है जिससे ऐसे प्रतिभाशाली बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। यह मुद्दा आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है लेकिन इन घटनाओं में कमी करने के लिए उपाय तलाशने का समय है। वहीं अकील ने कहा कि आदित्य मान सिंह की आत्महत्या का मामला अलग है और उसकी जांच होना चाहिए। इसमें जो भी दोषी पाया जाए कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री की चिंता

– बच्चों के बस्ते के बोझ से कमर झुकी।

– अच्छे नंबर के दबाव से मन को तोड़ा।

– बच्चों की स्वाभाविकता छीनी।

– स्कूलों के रैटिंग की दौड़ में बच्चों पर अच्छे नंबर का दबाव।

– अच्छे नंबर सफलता का मापदंड मान लिया गया।

– 10वीं व 12 वीं बोर्ड परीक्षा के पहले नौंवी से ही दबाव।

– खेल पीरियड स्कूलों में खत्म।

– नैतिक शिक्षा, महापुरुषों की जीवनी पढ़ाई में नहीं।

– वोकेशनल कोर्स से केरियर बनाने की बात समझाई जाए।

– स्कूलों में बच्चों का बचपन बरबाद करना सामाजिक अपराध।

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