एसपी कैंसिल कर देंगे बिल्डिंग परमिशन!

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भोपाल। यदि आपके मकान अथवा प्रतिष्ठान में अवैध गतिविधियां संचालित होने के प्रमाण मिलते हैं, तो पुलिस अधीक्षक (एसपी) बिल्डिंग परमिशन रद्द कर देंगे। राज्य सरकार द्वारा तैयार मप्र जनसुरक्षा विनियमन विधेयक (2010) के ड्राट में यह प्रावधान किया गया है। इतना ही नहीं, विधेयक का उल्लंघन करने पर 50 हजार रुपए तक का जुर्माना और कम से कम दो साल की सजा हो सकती है।
मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि निजी प्रतिष्ठानों द्वारा आमजन की सुरक्षा के पुता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। इसको ध्यान में रखते हुए जिन स्थानों पर लोगों का ज्यादा आना-जाना होता है, वहां आतंकी घटना से सुरक्षा प्रदान करने यह विधेयक अस्तित्व में लाया जा रहा है। गृह विभाग द्वारा 12 विभागों से अभिमत मिलने के बाद ड्रॉट को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधेयक विधानसभा में पेश होगा। वहां से पास होने पर यह कानून की शक्ल लेगा।
सायबर कैफे व पीसीओ संचालकों का दायित्व : कैफे अथवा पीसीओ का उपयोग करने वाले की पूरी जानकारी का रिकॉर्ड रखना होगा। क्लोज सर्किट कैमरा स्थापित करना होगा। पीसीओ से इंटरनेशनल कॉल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान का प्रमाण रखना अनिवार्य।
अपील कर सकते हैं : यदि जांच अधिकारी की कार्रवाई से कोई प्रतिष्ठान मालिक संतुष्ट नहीं होता है तो वह एसपी के समक्ष 15 दिन में अपील कर सकता है। इसका निराकरण एसपी 30 दिन में करेंगे। इसी तरह रेंज के अधिकारी के आदेश के खिलाफ सुरक्षा निदेशक के समक्ष अपील की जा सकती है।
प्राथमिकता के आधार पर लागू होगा कानून
जन सुरक्षा कानून प्राथमिकता के आधार पर प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसका ड्राट 12 विभागों को अभिमत के लिए भेजा गया है। साी विागों से अभिमत प्राप्त होने के बाद इसे अंतिम रुप दिया जाएगा।
अशोक दास, अपर मुय सचिव गृह

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