आरुषि केस: तलवार की जमानत अर्जी पर सुनवाई आज

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नई दिल्ली: नोएडा के चर्चित आरुषि हत्याकांड में सोमवार को एक और अहम फैसला आ सकता. आज सुप्रीम कोर्ट आरुषि के पिता राजेश तलवार की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा.
अगर इस मामले में राजेश तलवार को जमानत नहीं मिलती है तो उन्हें एक बार फिर जेल जाना पड़ सकता है.
शुक्रवार को आरुषि मर्डर केस को अहम मोड़ देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तलवार दंपत्ति पर निचली अदालत में आरुषि तलवार और नौकर हेमराज की हत्या का मुकदमा चलाने पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था .
दरअसल, फरवरी 2011 में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने तलवार दंपती को इस मामले का आरोपी मानते हुए पेशी का समन जारी किया था. जिसे तलवार दंपत्ति की तरफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. लेकिन यहां भी उन्हें राहत नहीं मिली. अब तलवार दंपत्ति पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.
राजेश तलवार पहले भी इस मामले में जेल जा चुके हैं, इसी को आधार बनाकर इनके वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत की मांग की है,जिसपर आज फैसला आना है.
गौरतलब है कि 15 और16 मई 2008 की रात नोएडा में तलवार दंपती की इकलौती बेटी आरुषि और उनके नौकर हेमराज की हत्या कर दी गई थी , लेकिन सीबीआई और तमाम जांच एजेंसियों की पड़ताल के बाद भी आज तक इस मर्डर केस को सुलझाया नहीं जा सकता है.
आरुषि हत्याकांड में आरुषि के माता-पिता के खिलाफ फैसला आने के बाद अब राजेश तलवार और नूपुर तलवार को 4 फरवरी को गाजियाबाद की सीबीआई की विशेष अदालत में पेश होना होगा. अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि तलवार दंपत्ति को अपनी बेटी की हत्या के आरोप में जमानत मिलती है या उन्हें जेल जाना पड़ेगा.
गौरतलब है कि शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय ने तलवार दंपत्ति पर आरुषि तलवार और नौकर हेमराज की हत्या का मुकदमा चलाने पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है. राजेश तलवार और नूपुर तलवार ने अदालत से अनुरोध किया था कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जाये. लेकिन न्यायमूर्ति एके गांगुली और जेएस खेहर ने इसे खारिज कर दिया.
हत्या की कहानी
हत्या के बाद में सीबीआई ने तलवार दंपत्ति को क्लिन चीट देते हुये कहा कि उसे तलवार दंपत्ति के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं मिला.
हालांकि ढ़ाई साल बाद पेश की गई सीबीआई की जांच को गाजियाबाद की स्थानीय अदालत ने खारिज करते हुए तलवार दंपत्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने की बात कही. अदालत का तर्क था कि प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य ही तलवार दंपत्ति के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिये पर्याप्त हैं. बाद में अदालत ने पिछले साल 9 फरवरी को तलवार दंपत्ति के खिलाफ सम्मन जारी किया था, जिसके खिलाफ वे इलाहाबाद हाईकोर्ट गये थे.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुये माना कि स्थानीय अदालत का निर्णय सही है. इसके बाद राजेश तलवार और नूपुर तलवार ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की. जहां 19 मार्च 2011 को उनको राहत देते हुए अदालत ने तलवार दंपत्ति पर मुकदमा चलाने पर रोक लगा दी. लेकिन शुक्रवार को तलवार दंपत्ति की याचिका उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दी.

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