मांडू सहित सभी धरोहरों में प्री-वेडिंग शूट के लिए देना होंगे 50 हजार रुपए

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धार। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने ऐतिहासिक इमारतों में प्री वेडिंग शूटिंग करने वालों पर सख्ती का मन बना लिया है। फिलहाल सभी महत्वपूर्ण पुरातत्व धरोहरों के बाहर बोर्ड लगाकर यह चेतावनी लगा दी गई है। वहीं इस तरह की शूटिंग के लिए यदि अनुमति ली जाती है तो 50 हजार रुपए प्रतिदिन का खर्च आता है। वहीं शर्तों का पालन करना भी बेहद जरूरी है। अनुमति भी भोपाल कार्यालय से लेना होती है। दो साल अनुमति की राशि 5 हजार रुपए हुआ करती थी।

महानगरों की तरह अब छोटे शहरों में भी प्री वेडिंग शूटिंग का चलन चल पड़ा है। ऐसे में अच्छी लोकेशन के लिए लोग मांडू के साथ अन्य पुरातात्विक धरोहर को पसंद करते हैं। जिन कपल की शादी होने वाली रहती है वे वीडियोग्राफर के साथ में फिल्मी दृश्यों की तरह कुछ शूटिंग करते हैं। विभाग को उच्च स्तर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कतिपय लोग प्री शूटिंग करके न केवल राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं बल्कि अन्य परेशानियां भी खड़ी कर रहे हैं।

अप्रैल 2016 तक था 5 हजार, अब 50 हजार शुल्क

इधर विभाग का यह भी मानना है कि वीडियो शूटिंग करने वाले फोटोग्राफर इस कारोबार से मोटी कमाई करते हैं। लाखों रुपए लोगों से लेते हैं और उसके बदले में विभाग के शुल्क का नुकसान करते हैं। अप्रैल 2016 तक शूटिंग के लिए महज 5 हजार रुपए ही लगा करते थे लेकिन अब प्रतिदिन शूटिंग के लिए 50 हजार रुपए शुल्क है। इस तरह की राशि प्रतिदिन लिए जाने के कारण कोई भी अनुमति लेने की स्थिति में नहीं रहता है।

पहले अनुमति की राशि कम थी तब भी इस तरह की कोई अनुमति के लिए पैसा खर्च नहीं करता था। जानकारी अनुसार अब तक किसी ने भी प्री-वेडिंग शूटिंग के लिए कोई अनुमति नहीं ली। इस संबंध में पुरातत्व विभाग के अधिकारी प्रशांत पाटनकर ने कहा कि प्रतिबंध पहले से ही है। इसमें प्री-वेडिंग के लिए भी हमने सूचना लगा दी है। अनुमति लेकर शुल्क चुकाते हुए ही शूटिंग की जा सकेगी। बिना अनुमति शूटिंग करने वालों पर नजर रखेंगे। उपकरणों की जब्ती की जाएगी।

दृश्यों पर भी आपत्ति

वैसे तो इस तरह की शूटिंग करना प्रतिबंधित है। साधारण हेंडी कैमरे से वीडियो शूटिंग की जा सकती है, लेकिन किसी फिल्म या प्री वेडिंग की शूटिंग के लिए मना ही है। यह बात सामने आ रही है कि कई बार ऐसे आपत्तिजनक दृश्यों की शूटिंग हो जाती है जो कि अन्य पर्यटकों के लिए ठीक नहीं होते। वहीं ऐसे में आपराधिक तत्वों के होने पर किसी भी घटना की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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