मार्क्स किसी इंसान की शख्सियत तय नहीं करते, न ही खूबी : अनीता करवाल

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क्या आपको पता है कि अलबर्ट आइंस्टीन के दुनिया के बेहतरीन भौतिक विज्ञानी बनने से पहले उन्हें बर्न यूनिवर्सिटी ने रिजेक्ट कर दिया था या फिर बिल गेट्स को अपने बैच का टॉपर होने के नाते माइक्रोसॉफ्ट में बतौर इंजीनियर रखा गया था?… हम बड़ो को अपने करियर के दौरान महसूस हुआ है कि कितना ज्ञान आपने पाया है, वह जरूरी नहीं, बल्कि कितनी होशियारी से हम इसका इस्तेमाल कर पाए, यह जरूरी है।’

सीबीएसई की चेयरपर्सन अनीता करवाल ने 10वीं और 12वीं के स्टूडेंट्स का जोश उनकी आने वाली जिंदगी के लिए कुछ इन्हीं बातों से बढ़ाया है। बोर्ड एग्जाम का टेंशन दूर करते हुए चेयरपर्सन ने कहा है कि मार्क्स किसी इंसान की शख्सियत तय नहीं करते और न ही ये कोई खूबी या क्षमता तय करते हैं।

मेरा बोर्ड रिजल्ट मुझे याद नहीं

बोर्ड एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स को अपने मैसेज में अनीता ने कहा है, क्या आपको पता है कि सीबीएसई बोर्ड एग्जाम के 10+2 सिस्टम के पहले बैच में मैं भी शामिल थी। आज जब मैं पीछे देखती हूं, तो सिर्फ मुझे यह याद है कि मैंने जमकर मेहनत की, खूब रिविजन किया और इसके बावजूद मुझे अपना पसंदीदा गाना रेडियो में सुनने या पढ़ाई से ब्रेक लेने के बीच दोस्त से गप्पें मारने का मौका मिला। जो मुझे याद नहीं है, वो है मेरा रिजल्ट।

-बच्चों , चिंता और घबराहट छोड़ो

आईएएस ऑफिसर अनीता ने स्टूडेंट्स के नाम अपने लेटर में कहा है, मुझे मालूम है कि आप जिंदगी के चौराहे पर खड़े हैं, जहां इन बातों का आपके लिए कोई मतलब नहीं होगा। मगर ये मायने रखेंगी और आप अपनी पसंद के करियर में आगे बढ़ेंगे। ये दिन जल्द निकल जाएंगे, अगर आप वर्तमान और भविष्य के लिए पॉजीटिव एनर्जी रखेंगे। मगर अगर आप नेगेटिव होंगे तो ये दिन खींचेंगे, इसलिए प्यारे बच्चों, तनाव, चिंता, घबराहट को खुद के अंदर ज्यादा देर न रहने दें।

ये सिर्फ ‘शब्द’ हैं, और ‘शब्द’ जिंदगी नहीं चलाते। उन्होंने कहा है, ‘हैरी पॉटर ऐंड द चैंबर ऑफ सीक्रेट्स’ किताब में डंबलडोर ने कहा है, ‘यह हमारी चॉइस है, हैरी, जो दिखाती है कि हम सचाई में क्या हैं, अपनी क्षमताओं से बहुत ज्यादा।’ चेयरपर्सन ने आखिर में बच्चों को शुभकामनाओं देते हुए कहा है कि होशियारी से चुनाव करें, कॉन्फिडेंस और कड़ी मेहनत को चुनें।

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