भोपाल सहित प्रदेशभर में प्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा चुका है। इसके बावजूद शहर में रोजाना 12 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा निकल रहा है। इसमें से 2 से अधिक मीट्रिक टन प्लास्टिक शहर के गलियों और नालियों में जमा होता है। इससे नालियां चोक होती हैं और बारिश में जल भराव की समस्या होती है। खाद्य पदार्थ लगी प्लास्टिक को मवेशी खाकर मर रहे हैं।

बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार ने पॉलीथिन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है तो शहर में अमानक पॉलीथिन कहां से आ रही है? बताया जाता है कि शहर में बिकने वाली ज्यादातर पॉलीथिन गुजरात और महाराष्ट्र से लाई जाती है। इसके गोदाम पुराने शहर में मौजूद हैं, जहां से पूरे शहर में सप्लाई की जाती है।

बता दें कि राज्य सरकार ने मई 2017 में प्लास्टिक कैरी बैग (70 माइक्रोन से कम) के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया था। प्लास्टिक कैरी बैग का खरीदने व बेचने के साथ ही इसके इस्तेमाल करने वालों पर भी जुर्माने का प्रावधान है। इतनी सख्ती के बाद भी पॉलीथिन का इस्तेमाल नहीं रुक रहा। फल-सब्जी के ठेले वाले, किराना दुकानदार खुलेआम प्लास्टिक कैरी बैग का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरीबैग पर नियंत्रण के लिए नगरनिगम और पीसीबी के पास जिम्मेदारी है। लेकिन, वह सालभर में महज दो य तीन कार्रवाई कर पल्ला झाड़ लिया है।

पॉलीथिन फ्री क्षेत्र घोषित पर जारी है उपयोग

शहर के कई हिस्से पॉलीथिन फ्री घोषित किए जा चुके हैं। इसमें बोट क्लब एरिया, विट्टन मार्केट, गांधी मार्केट भेल, प्रशासन अकादमी परिसर, पर्यावरण परिसर, चार इमली शामिल है। लेकिन, बोट क्लब सहित विट्टन मार्केट की सब्जी मंडी में धड़ल्ले से पॉलीथिन का उपयोग जारी है।

20 फीसदी प्लास्टिक का नहीं हो पाता कलेक्शन

नगर निगम द्वारा प्लास्टिक के निष्पादन के लिए कलेक्शन सेंटर स्थापित किए गए हैं। शहर से रोजाना 850 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसमें से सार्थक संस्था के सहयोग से 10 मीट्रिक टन प्लास्टिक वेस्ट कलेक्शन किया जाता है। इसमें 8 मीट्रिक टन प्लास्टिक रिसाइकिल किया जाता है। बाकी दो मीट्रिक टन नॉन रिसाइकिल होता है, जिसे चिप्स बनाकर फैक्ट्रियों में भेजा जाता है। लेकिन, 2 से अधिक मीट्रिक टन प्लास्टिक शहर से उठ ही नहीं पाता।

कब-कब हुए पॉलीथिन रोकने के आदेश

एनजीटी अप्रैल 2013 को प्रदेश में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए। फिर दोबारा जनवरी 2015 से प्लास्टिक पॉलीथिन रोक लगाई। सीएम ने 26 जनवरी 2017 को प्रदेश में 1 मई 2017 से पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।

पांच टन के चार नए सेंटर बनेंगे

निगम और पीसीबी के सहयोग से पॉलीथिन रिसाइकिल का काम कर रही सार्थक संस्था के पदाधिकारियों के अनुसार शहर में पांच-पांच टन के चार नए सेंटर खोले जाएंगे। इससे शहर में पॉलीथिन का रिसाइकिल अधिक से अधिक हो सकेगा।

जला दिया जाता है पॉलीथिन

नगर निगम सीमा के निजी कॉलोनियां जहां निगम कचरा कलेक्शन नहीं कर पाता। वहां कचरे को आग लगा दिया जाता है। इसके अलावा निगम सीमा से बाहरी इलाके में कचरे का कलेक्शन नहीं हो पाता। प्लास्टिक वेस्ट के जलने से डॉईआक्सिन गैस पैदा होती है, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लिए जिम्मेदार है।

एक्सर्पट व्यू

शहर से निकले वाले 80 फीसदी प्लास्टिक वेस्ट को भानपुर सेंटर पहुंचाया जा रहा है। जहां से रिसाइकिल किया जा रहा है। नॉन रिसाइकिल वेस्ट को चिप्स बनाकर सीमेंट फैक्ट्रियों में कोयले की जगह ईंधन के रूप में भेजा जाता है। बेहतर है कि लोग इसका उपयोग न करें – इम्तियाज अली, सदस्य, राज्य स्तरीय ठोस प्रबंधन सलाहकार समिति व सार्थक संस्था प्रमुख

जल्द ही इस पर काम होगा

शहर में प्लास्टिक वेस्ट एक बड़ी चुनौती है। इससे कई तरह की समस्या हो रही है। प्लास्टिक वेस्ट पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। जल्द ही इस पर काम होगा। आने वाले समय में प्लास्टिक वेस्ट की समस्या शहर में नहीं होगी – आलोक शर्मा, महापौर