देश को आज अहिंसा और समरसता की जरूरत है: राष्ट्रपति कोविंद

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महू। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महू में बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आज राष्ट्र बाबासाहेब की 127 वी जयंती मना रहा है। और मेरा सौभाग्य है कि मैं देश का राष्ट्रपति बना। मैं इससे पहले भी कई बार महू आया हूं और बाबासाहेब के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा महू बाबासाहेब की जन्मस्थली पर आकर आती है।

राष्ट्रपति कोविंद ने अपने स्वागत के लिए आभार जताते हुए कहा कि बाबासाहेब की वजह से सभी को संविधान में समानता का अधिकार मिला। जयहिंद का मतलब बाबासाहेब की जय होता है। बाबासाहेब ने सबसे ज्यादा जोर शिक्षा पर दिया। उनका कहना था कि शिक्षित बनों और संगठित रहो। वह भारत के पहले मंत्रीमंडल में विधिमंत्री थे और उस वक्त मंत्रीमंडल में सबसे शिक्षित मंत्री थे।

बाबासाहेब ने अपमान और अभावों के बीच जीवन बनाया और अहिंसा का मार्ग चुना। महिलाओं को संपत्ति में हिस्सा दिलाने की बात पर उन्होने मंत्रीमंडल से इस्तीफा दिया था। रिजर्व बैंक की भूमिका में उनकी अहम भूमिका थी और दामोदर वैली, हीराकुंड योजना में भी उनका अहम योगदान था। इस समय समाज और देश को बाबासाहेब के आदर्शो पर चलकर अहिंसा और समरसता की जरूरत है। देश में विभाजनकारी ताकतों का उल्लेख नहीं होना चाहिए।

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