Cash Crunch से आम लोग परेशान, दिक्कत खत्म होने में लग सकता है एक हफ्ता

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नई दिल्ली। नवंबर 2016 के बाद एक बार फिर देश में एटीएम मशीनें कैश नहीं उगल रही हैं। इसका सीधा असर आम जिंदगी पर देखने को मिल रहा है। त्यौहार और शादियों के सीजन में एटीएम सूखने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं।

हालांकि, सरकार और रिजर्व बैंक ने कहा है कि कैश की किल्लत नहीं है लेकिन कुछ राज्यों में सप्लाय में कमी आने से ऐसा हुआ है। सरकार का कहना है कि हालात सामान्य होने में अभी कुछ वक्त लग सकता है। वहीं विपक्ष ने इसे वित्तीय इमरजेंसी करार दिया है। हालात यह हैं कि लोगों को एक बार फिर से नोटबंदी के दिन याद आने लगे हैं।

कितने दिन में सामान्य होगी स्थिति?

वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में एटीएम नकदी की कमी 5 से सात दिनों में सामान्य हो जाएगी। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक देश में पिछले तीन महीनों में मुद्रा की मांग में असाधारण उछाल देखा गया है। देश के जिन हिस्सों में मांग में यह असामान्य उछाल आया है उनमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और बिहार शामिल हैं।

क्या है वर्तमान स्थिति:

– 1.75 लाख करोड़ रुपए की करेंसी स्टॉक में

– आरबीआई ने 500 रुपए के नोट की छपाई दोगुना करने का वादा किया

– देश में 18 लाख करोड़ रुपए की करेंसी प्रचलन में

– नोटबंदी से पूर्व यह आंकड़ा 17.5 लाख करोड़ रुपए था

देश के कई राज्यों में हालात हुए खराब

देश के कई हिस्सों से एटीएम में पैसा नहीं होने की सूचनाएं तो लगातार आ रही थीं, लेकिन पिछले तीन दिनों से बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से जिस तरह से नकदी संकट की खबरें सामने आई हैं, उसने कान खड़े कर दिए हैं। उक्त राज्यों के खास तौर पर अर्धशहरी व ग्रामीण इलाकों में लोगों को एटीएम से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। विपक्ष ने इसे ‘वित्तीय इमरजेंसी’ करार दिया है।

लोग मजबूरी में निकाल रहे हैं 2000 रुपए का नोट

नोटबंदी के समय वादा किया गया था कि 50, 100 रुपये के नोटों की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी। 200 रुपये के नए नोट जारी हुए हैं, लेकिन उनकी संख्या कम है। सौ रुपये के पुराने नोट बैंकों को दिए जा रहे हैं जिसे बैंक इसलिए इस्तेमाल नहीं कर रहे कि ये नोट एटीएम में फंस जाते हैं। अभी एटीएम को 50 रुपये के लायक बनाया भी नहीं गया है।

ऐसे में बैंक सिर्फ व 2000 रुपये के नोट एटीएम में डाल रहे हैं, जो राशि के लिहाज से तो अधिक होते हैं, लेकिन संख्या में कम होते हैं। लोगों को 600 की जगह 1000 और 1200 रुपये की जगह 2000 रुपये निकालने पड़ रहे हैं। इससे ज्यादा निकासी होने के कारण एटीएम जल्दी खाली हो जाते हैं। यह स्थिति नवंबर, 2016 में नोटबंदी के बाद से ही चल रही है।

राजधानी की स्थिति

दिल्ली में 10 हजार से अधिक एटीएम हैं। इनमें से 30-40 फीसद नकदी संकट से जूझ रहे हैं। बताया जा रहा है कि आरबीआइ की ओर से दिल्ली-एनसीआर के बैंकों को 11 अप्रैल के बाद नकदी की आपूर्ति नहीं हुई है। अतिरिक्त कैश बैंकों की ओर से दूसरे सर्कल में भेजने पर रोक से भी यह संकट पैदा हुआ है। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन, दिल्ली के सचिव सुनील बंसल ने बताया कि आरबीआइ की ओर से 2000 के नये नोट न छापने से भी यह किल्लत पैदा हुई है। छोटे नोटों को लेकर एटीएम में तकनीकी दिक्कतें भी आ रहीं हैं। उन्होंने बताया कि काउंटर पर कैश भरपूर है, लेकिन एटीएम में दिक्कतें हैं।

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