नक्सलियों को भरोसा ही नहीं था, इतने दुर्गम इलाके में पहुंच जाएगी फोर्स

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सुकमा से 100 किलोमीटर अंदर जंगलों में पहली बार फोर्स की धमक दिखाई दी। नक्सल विरोधी आपरेशन में अब तक फोर्स इन इलाकों में पहुंची नहीं थी। डीजी नक्सल आपरेशन डीएम अवस्थी ने बताया कि इंटेलिजेंस बेस्ड सूचना के आार पर इस आपरेशन को प्लान किया गया। नक्सली आराम से अपने कैंप में सोये हुए थे और डीआरजी के जवानों ने धावा बोल दिया।

अवस्थी ने बताया कि सोमवार सुबह छह से सात बजे के बीच कोंटा के नलकटोंग गांव में 200 जवानों की टीम ने हमला किया। उस समय नक्सली कैंप में ही थे। अचानक हुई फायरिंग के बाद नक्सलियों ने फोर्स पर जवाबी हमला करने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने हमले को विफल करते हुए बड़ी सफलता अर्जित की।

एसआइबी के आला अधिकारियों ने बताया कि पिछले तीन साल में इस दुर्गम इलाके में 14 नये कैंप खोले गए। इन कैंपों से जवान अब आगे जंगलों की ओर बढ़ रहे हैं। गृह मंत्रालय के सुरक्षा सलाहकार विजयकुमार की रणनीति का असर अब दिखाई देना लगा है। केंद्र सरकार ने सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा में नक्सलियों को समेटने की कार्ययोजना बनाई थी। गोलापल्ली के बारे में अधिकारियोंं ने बताया कि यह नक्सलियों का सेफ जोन माना जाता है। पिछले 30 साल से फोर्स इस इलाके में घुसने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी।

बड़े नक्सली कमांडर की है मौजूदगी

डीजी अवस्थी ने बताया कि सुकमा में एक और आपरेशन चल रहा है। यहां नक्सलियों के बड़े कमांडर की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिसके बाद आपरेशन प्लान किया गया है। पिछले दो दिन से 200 से ज्यादा जवानों की टुकड़ी जंगल में डेरा डाले हुए है। यहां भी पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। हालांकि वहां की पूरी रिपोर्ट अभी तक नहीं आ पाई है।

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