। मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न कांड में मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर की कोर्ट में पेशी के दौरान महिलाओं ने उसके चेहरे पर कालिख पोत दी। ब्रजेश ने कहा है कि उसके नाम के न्यायाधीश भी यहां आते थे। यह बात उसने पेशी के दौरान मीडिया कर्मियों से कही। मामले में न्यायाधीश का नाम पहली बार आया है। एडीजे स्तर के न्यायाधीश को छह माह में एक बार बालिका गृह का निरीक्षण के लिए आना होता था।

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Bihar: A woman threw ink on accused Brajesh Thakur outside court in Muzaffarpur.

बालिका गृह कांड के मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर ने कहा है कि वह मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाह रहा था। इसकी तैयारी भी करीब करीब कर ली थी। ब्रजेश के इस बयान से राजनीति पारा और गरम हो गया है। वहीं, ब्रजेश ने इस मामले में एक न्यायाधीश के नाम को भी सामने ला दिया है। पेशी के दौरान कोर्ट लाए गए ब्रजेश ने कहा कि उसके नाम के एक न्यायाधीश बालिका गृह आते थे। लड़कियां उन्हें ही हंटर वाले अंकल कह रहीं। मुख्य आरेपी के इन दो बयानों से मामला और गरमा गया है।

मंजू वर्मा और उसके पति से संबंध से किया इन्कार

वहीं, ब्रजेश ने समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा व उसके पति से गहरा संबंध होने से इन्कार किया है। कहा, उनके साथ व्यवहारिक संबंध रहे हैं। इस बीच कोर्ट हाजत से पेशी के लिए ले जाए जा रहे ब्रजेश के मुंह पर महिलाओं ने कालिख पोत दी। इससे कोर्ट परिसर में अफरातफरी मच गई। एक महिला को हिरासत में लिया गया है।

ब्रजेश की काली संपत्ति की सीबीआई जांच शुरू

ब्रजेश की काली कमाई की जांच भी सीबीआई ने शुरू कर दी है। ब्रजेश ने मुजफ्फरपुर और पटना से लेकर दिल्ली तक अपना दायरा फैला रखा है। अबतक की जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि ब्रजेश ठाकुर ने पिछले पांच वर्षों में करोड़ों की चल-अचल संपत्ति अर्जित की है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ब्रजेश की संपत्ति का पता लगाने में जुटे हैं।

मुजफ्फरपुर पुलिस ने इस मामले में अपनी सुपरविजन रिपोर्ट में इसकी चर्चा भी की है। सीबीआई को यह रिपोर्ट मिल गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रजेश ठाकुर के फर्जी एनजीओ में उसके सगे-संबंधियों को ही वेतन भोगी कर्मचारी बना रखा था। उसका यह धंधा सिर्फ मुजफ्फरपुर बालिका गृह और महिला शेल्टर होम में ही नहीं, समस्तीपुर के वृद्धाश्रम में भी कायम था। उसने फर्जी नामों से कई बैंक खाते भी खोल रखे हैं।

इस सुपरविजन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उसने एनजीओ के नाम से करोड़ों रुपये बनाए हैं। जिससे न केवल मुजफ्फरपुर में बल्कि पटना, दिल्ली, समस्तीपुर दरभंगा और बेतिया में भी करोड़ों की अचल संपत्ति अर्जित की है।

मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न कांड में बिहार की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा व उनके पति चंदेश्वर वर्मा की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। बालिका गृह में रहने वाली 34 नाबालिग बच्चियों के यौन उत्पीड़न के मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर के साथ मंजू वर्मा के पति चंदेश्वर वर्मा लगातार संपर्क में रहे हैं। जनवरी से लेकर मई के बीच ब्रजेश ठाकुर के साथ मंजू वर्मा के पति चंदेश्वर वर्मा की एक-दो बार नहीं बल्कि, कुल 17 बार बातचीत हुई है।

लड़कियों को नहीं भेजा जाता था घर, रजिस्टर में बदल देते थे नाम-

पटना की पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित इकार्ड अल्पावासगृह में भी लड़कियां हिंसा व अमानवीयता का शिकार होती रहीं। अल्पावासगृह में छह से आठ महीने गुजारने के बाद भी लड़कियों को घर नहीं भेजा जाता था, जबकि उनके पास घर का पता व मोबाइल नंबर भी था। संस्था के जिम्मेदार उन्हें कमरे में ही रखते थे। रजिस्टर में लड़कियों का नाम ही बदल देते थे ताकि पकड़े न जाएं।

सोशल ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि इकार्ड अल्पावास गृह केन्द्र में घर से भूली-भटकी लड़कियां रहती थीं। उनके पास परिजनों का नाम पता फोन नंबर है, लेकिन उन्हें परिवार से संपर्क करने नहीं दिया जाता। बच्चियों के मुताबिक संस्थान के आरटीओ (रिहैबिलिटेशन ट्रेनी ऑफिसर) उनका शारीरिक उत्पीड़न करते हैं।

रिपोर्ट में स्पष्ट है कि हिसात्मक वातावरण से आजिज आकर साल भर पहले एक लड़की ने आत्महत्या कर ली थी। एक बच्ची के पास परिजनों का फोन नंबर था, मगर उसे बात नहीं करने दिया गया और मोबाइल फेंक दिया गया। समय के साथ उसका मानसिक संतुलन बिगड़ता गया।