शेल्टर हाउस हो तो ‘कोपलवाणी’ जैसा, तारीफ करते नहीं थकती बच्चियां

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देश-दुनिया में बालिकाओं के हुनर की खूब चर्चा हो रही है, लेकिन उनके साथ हो रहे जघन्य अपराध भी छिप नहीं रहे हैं। कई मामले ऐसे हैं, जिनमें यदि थोड़ी सावधानी बरती जाती तो महिलाओं और बालिकाओं पर हुए अपराध को रोका जा सकता था।

इन्हीं बातों को ध्यान में रख नईदुनिया की टीम दिव्यांग छात्राओं की सुरक्षा की तस्दीक कर रही है। शुक्रवार को जब बालिकाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर कोपलवाणी संस्था की व्यवस्था का जायजा लिया गया तो वहां छात्राओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान दिया गया था।

बालिकाएं स्वयं कहती हैं कि भगवान ने तो हमारा स्वर छीना, लेकिन हम कोपलवाणी में शिक्षा लेकर अपने आत्मविश्वास की आवाज बुलंद कर रही हैं। हम सब यहां सुरक्षित हैं, क्योंकि यहां हमारी सुरक्षा में 24 घंटे दो पालियों में महिला सुरक्षाकर्मी तैनात रहती हैं।

12 सीसीटीवी कैमरे से पूरे परिसर की देखरेख की जाती है, ताकि किसी भी आपराधिक गतिविधि पर रोक लगाई जा सके। भोजन से लेकर लाइब्रेरी तक की व्यवस्था परिसर के अंदर है, ताकि छात्राओं को बाहर जाने की जरूरत ही न पड़े।

छात्रावास और स्कूल आमने-सामने संस्था में दिव्यांग मूकबधिर बालिकाओं के लिए छात्रावास परिसर के ठीक सामने विद्यालय परिसर बनाया गया है, ताकि छात्राओं को आने-जाने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। अध्यापन के लिए शिक्षिकाएं और शिक्षक उपलब्ध है। 53 छात्राएं इस परिसर में छात्रावास, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लैब, प्यूरी फायर वाटर कूलर आदि सभी सुविधाएं पा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था

– 12 सीसीटीवी से पूरे परिसर की निगरानी

– दो पालियों में महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती

– छात्रावास के लिए सुबह-शाम दो वार्डन की व्यवस्था

भोजन व्यवस्था

नाश्ता- सुबह 07 बजे से

भोजन- 10 से 11 बजे तक

– नाश्ता – शाम 04 से 05 बजे तक

रात्रि भोजन- शाम – 7 से रात 8 बजे तक

शिक्षकों की व्यवस्था

– परिसर में चौबीस घंटे तक साइन लैंग्वेज की प्रशिक्षका का निवास

– सात विशेष शिक्षक- दो पुरुष और पांच महिलाएं

– छ: सामान्य शिक्षक – पूरी महिलाएं

– दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि उन्हें कभी ये अहसास न हो कि उन्हें सृष्टि ने कमजोर बनाया है। वे समाज का अभिन्न हिस्सा है, उन्हें किसी भी तरह अन्य लोग कमजोर न समझे, इसलिए पूरी तैयारी के साथ शिक्षा दी जा रही है। – विजय लक्ष्मी तिवारी, अधीक्षिका, कोपलवाणी मूकबधिर संस्था, रायपुर

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