RS उपसभापति उम्मीदवार पर एनडीए उलझी, अकाली दल ने नकारा

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नई दिल्ली। राज्यसभा के उपसभापति पद का चुनाव नौ अगस्त को कराने की घोषणा के साथ ही सरकार और विपक्ष के बीच शह-मात का सियासी दौर तेज हो गया है। केंद्र में सत्तारूढ़ राजग ने जदयू सांसद हरिवंश को उपसभापति उम्मीदवार बनाने का फैसला कर विपक्षी एकजुटता को तोड़ने का बड़ा दांव चल दिया है।

हालांकि, वो विपक्षी एकजुटता को तोड़े उससे पहले एनडीए में ही फूट पड़ती दिख रही है। जानकारी के अनुसार हरिवंश के नाम से एनडीए के घटक अकाली दल और शिवसेना सहमत नहीं है। अकाली दल ने आज सुबह 10 बजे अपनी नेताओं की बैठक बुलाई जिसमें एनडीए उम्मीदवार का विरोध हुआ है। हालांकि, पार्टी ने चुनाव को लेकर अपनी रणनीति का खुलासा नहीं किया है।

वहीं उपसभापति चुनाव के सहारे विपक्षी एकता को नए पायदान पर ले जाने की कसरत में जुटी कांग्रेस भी विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार मैदान में उतराने की पेशबंदी कर रही है। विपक्षी खेमा द्रमुक के त्रिची शिवा और राकांपा की वंदना चव्हाण को उम्मीदवार बनाने पर गौर कर रहा है। वैसे तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदू शेखर राय का नाम भी संभावितों में है। वैसे विपक्ष ने अपना इरादा तो साफ कर दिया है, लेकिन उम्मीदवार का फैसला मंगलवार को ही होगा।

राज्यसभा में शून्यकाल खत्म होने से ठीक पहले सभापित वेंकैया नायडू ने उपसभापति पद का चुनाव की तारीख की घोषणा करते हुए अधिसूचना जारी करने की बात कही। इस पद के लिए बुधवार दोपहर 12 बजे तक नामांकन दाखिल करने की समयसीमा रखी गई है। गुरुवार सुबह 11 बजे चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

आंकड़े भाजपा के खिलाफ

राज्यसभा के आंकड़ों के हिसाब से भाजपा सीधे अपने उम्मीदवार को जिता नहीं सकती। इसीलिए सहयोगी दल के चेहरे के सहारे विपक्षी खेमे में सेंध लगाने का दांव चला है। हरिवंश की साफ-सथुरी छवि है। माना जा रहा कि राजग इसके जरिये बीजद का समर्थन हासिल करने की कोशिश में है। उपसभापति के चुनाव में बीजद के नौ सांसदों का वोट निर्णायक है। बीजद जिस खेमे का साथ देगी उपसभापति पद उसी के पास जाएगा।

मगर बीजद ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान जिस तरह वाकआउट कर राजग और विपक्ष से जो दूरी बनाई उसे देखते हुए उपसभापति चुनाव में भी उसके वोटिंग से बाहर रहने की संभावना को नकारा नहीं जा रहा। बीजद अगर दोनों से दूरी बनाती है तो फिर चुनावी मुकाबला बेहद कांटे का होगा। हालांकि अन्नाद्रमुक, वाईएसआर कांग्रेस और टीआरएस के समर्थन के सहारे राजग जीत की उम्मीद कर रहा है।

मौजूदा गणित

राज्यसभा में वर्तमान में 244 सदस्य हैं। पूर्ण सदन में जीतने के लिए 123 सदस्यों का समर्थन जरूरी होगा। यदि चारों पार्टियों ने राजग उम्मीदवार का समर्थन किया तो उस स्थिति में संख्या 126 के ऊपर जाएगी। सदन में 73 सदस्यों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद कांग्रेस के पास 50 सदस्य हैं। भाजपा के सहयोगी दलों जदयू, शिवसेना और अकाली दल के पास क्रमशः छह और तीन-तीन सदस्य हैं। इसके अलावा भाजपा को छह निर्दलीय सदस्यों में से चार के समर्थन की उम्मीद है।

आजाद की अगुआई में विपक्ष की बैठक

राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद की अगुआई में विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई। इसमें कांग्रेस के अलावा तृणमूल, राकांपा, राजद, द्रमुक, सपा आदि के नेता शामिल हुए। विपक्षी खेमे ने बेशक त्रिची शिवा और वंदना चव्हाण की संभावित उम्मीदवारी को लेकर चर्चा हुई। मगर हरिवंश के मुकाबले ऐसा चेहरा उतारने पर और गंभीरता से गौर करने की बात हुई ताकि बीजद को विपक्षी उम्मीदवार के पक्ष में लाने को बाध्य किया जा सके। इसीलिए हरिवंश के मुकाबले विपक्ष आखिरी समय में कोई डार्क हार्स प्रत्याशी उतारने के विकल्प को खारिज नहीं कर रहा। राकांपा की वंदना चव्हाण की उम्मीदवारी राजग के घटक शिवसेना को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा।

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