विधानसभा में हंगामा, विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक एक दिन के लिए सस्पेंड

dewanरायपुर। ‘छत्तीसगढ़ के गांधी’ कहलाने वाले संत कवि और पूर्व सांसद पवन दीवान को गुरुवार दोपहर 2 बजे संत रीति-रिवाज के अनुसार राजिम स्थित ब्रम्हचर्य आश्रम में समाधि दी जाएगी। समाधि के पहले पूरे राजकीय सम्मान के साथ तोपों की सलामी दी जाएगी। लंबी बीमारी के बाद बुधवार को गुड़गांव के मेदांता हॉस्पिटल में 71 साल की उम्र में दीवान का निधन हो गया था।
दर्शन को जुटी हजारों की भीड़
– राजिम में उनके अंतिम दर्शन के लिए हजारों की भीड़ जुटी हुई है।
– संत कवि का शव देर शाम राजिम पहुंचा था। रात एक बचे आश्रम में राम नाम संकीर्तन व गीता पाठ हुआ।
– सुबह पार्थिव शरीर को दीवान के गृह ग्राम किरवई ले जाया गया।
– अब वापस राजिम में लाकर शोभायात्रा निकाली गई है।
– शोभायात्रा के बाद राजकीय सम्मान के साथ समाधि दी जाएगी।
विधानसभा की कार्रवाई स्थगित
– संत पवन दीवान के सम्मान में गुरुवार को विधानसभा सत्र की कार्यवाही एक दिन के लिए स्थगित रखी गई है।
कौन थे पवन दीवान?
-राजिम के करीब किरवई गांव में 1 जनवरी 1945 को जन्मे दीवान संस्कृत, हिंदी व अंग्रेजी में एमए थे। इसके अलावा वे कई भाषाओं के ज्ञाता थे।
– युवावस्था में ही संन्यास लेकर वे स्वामी अमृतानंद बन गए थे, लेकिन उनकी ख्याति अपने मूल नाम से ही हुई।
– वे एक लोकप्रिय भागवत कथाकार थे और गांव-गांव में उनकी कथाएं होती थीं। कविताओं और चुटकियों से भरपूर उनकी कथा सुनने भारी भीड़ उमड़ती थी।
– 1977 में पं. श्यामाचरण शुक्ल जैसे दिग्गज नेता को हराकर वे विधायक बने। उन्हें जेल मंत्री बनाया गया।
– 1991 और 96 में वे महासमुंद से सांसद चुने गए। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद वे राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष बनाए गए।
– छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व किया और छत्तीसगढ़ के गांधी के रूप में जाने गए।

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