टीसीएस को सेज मामले में मिली बड़ी कामयाबी

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इंदौर। टीसीएस को आने वाले तीन सालों में इंदौर में अपने प्रोजेक्ट का संचालन शुरू करना होगा। मंगलवार को दिल्ली में हुई बोर्ड ऑफ अप्रूवल की बैठक में जैसे ही टीसीएस एसईजेड (सेज) के प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली, कंपनी पर यह शर्त लागू हो गई। तीन साल के भीतर कम से कम एक यूनिट टीसीएस को शुरू कर पहला एक्सपोर्ट भी करना होगा। ऐसा नहीं होने पर टीसीएस का एसईजेड रद्द हो जाएगा और उन्हें एक्सटेंशन के लिए फिर से आवेदन करना होगा।
तीन साल की सीमा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के लेटर ऑफ परमिशन के जारी होने के साथ ही शुरू हो जाएगी। एसईजेड इंदौर के विकास आयुक्त ए.के. राठौर के अनुसार 31 जनवरी के पहले टीसीएस को यह लेटर भेज दिया जाएगा। मार्च के पहले गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया जाएगा जिसके आधार पर कंपनी को तमाम रियायतें भी मिलने लगेंगी।
एसईजेड क्या होता है
– जमीन के जिस हिस्से को एसईजेड का दर्जा दिया गया है उस क्षेत्र में संचालित गतिविधियों पर किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं वसूला जाएगा।
– एसईजेड में जिस प्रोडक्ट का उत्पादन होता है उसे मुख्य रूप से एक्सपोर्ट किया जाता है। कंपनी चाहे तो इंडिया में प्रोडक्ट बेच सकती है बशर्ते उसे इंपोर्ट ड्यूटी चुकानी होगी।
– यह योजना मुख्य रूप से विदेशी व्यापार और निवेश को बढ़ाने के लिए वर्ष 2005 में लागू की गई थी।
– डेवलपर्स एसईजेड लेकर अपना स्पेस दूसरी कंपनी को बेच सकती है। इस जमीन के हिस्से में दूसरी कंपनी निर्माण कार्य करती है तो उसे भी ड्यूटी फ्री मटेरियल बाजार से मिलेगा।
किसके लिए क्या मायने
जनता के लिए- एसईजेड से जनता के लिए खुलेंगे नौकरियों के द्वार, दस हजार नई नौकरियां निकलेंगी।
सरकार के लिए- अन्य आईटी कंपनियों के भी प्रदेश में आने की संभावनाओं को बल मिलेगा। खजाना समृद्ध होगा।
कंपनी के लिए- कंपनी को सर्विस टैक्स, इम्पोर्ट ड्यूटी, इलेक्ट्रिक ड्यूटी और वैट व एक्साइज से मुक्ति रहेगी। पहले पांच साल तक कोई भी आयकर नहीं लगेगा।

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