शहर सरकार का बजट बनाने के पहले जनता से ली जाए राय

bhilaiभिलाई।शहर विकास के लिए भिलाई की जनता आगे आ रही है। उन्होंने निगम के जनप्रतिनिधियों और अफसरों को इस बजट के सुझाव दिया है। कहा कि, बजट में प्रावधान करने और सरकार से फंड लेने से काम नहीं होगा। जमीनी स्तर पर उसे क्रियान्वयन कराना बड़ा काम है। इसी काम से भिलाई का विकास होगा।

तब निगम का यह बजट कारगार साबित होगा। फरवरी के अंतिम सप्ताह में पेश होने वाले इस बजट से लोगों को काफी उम्मीदें व अपेक्षा है। जो पिछले पांच साल से पूरी नहीं हुई। निगम के जरूरी प्रपोजल को देखते हुए राज्य शासन ने पानी, सड़क, सफाई और सौंदर्यीकरण जैसे जरूरी कार्यों के लिए फंड भी दिया। निगम को राशि मिल गई। इसके बावजूद आज समस्या जस की तस है। भास्कर ने जब इसकी पड़ताल की तो कई खुलासे हुए। सन् 2015-16 के बजट में साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए का प्रावधान किया।

शहर में काम चल रहा है

बजट में संभावित कार्य भेजे जाते हैं। इसमें शासन जरूरी कार्यों की स्वीकृति देती है। जिन प्रोजेक्ट के लिए फंड मिला है। उसके कार्य चल रहे हैं। कई कंप्लीट भी हो गए हैं। जीएस ताम्रकार, प्रभारी आयुक्त, नगर निगम भिलाई

हम वास्तविक बजट बनाएंगे

राज्य शासन से जो फंड पहले मिला था। उसके कार्य प्रगति पर है। इस बार वास्तविक बजट होगा। हर कार्य के लिए प्लानिंग है। प्राथमिकता के हिसाब से कार्य किए जाएंगे। शासन से स्वीकृति भी कराएंगे। देवेंद्र यादव, मेयर, नगर निगम भिलाई

9%समस्याओं के समाधान पर जोर दिया जाए।

17%जो प्रस्ताव बनाते हैं, स्वीकृति मिले।

21%मूलभूत समस्याओं के समाधान की पहल करें।

स्मार्ट सिटी की तर्ज पर बजट के लिए भी हो रायशुमारी।

निगम के बजट पर जब हमने 412 लोगों से फीडबैक लिए। ज्यादातर ने वास्तविक बजट पर जोर दिया।

भास्कर सर्वे

इन कार्यों के लिए निगम को मिला फंड मगर हालात जस के तस

निगम के जिम्मेदारों की राय

पब्लिक डिमांड जरूरी

सौंदर्यीकरण : वर्ष 2014-15 के बजट में सौंदर्यीकरण पर करीब 35 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया। सरकार ने ढाई करोड़ रुपए फंड दिया। अब तक टाउनशिप के वार्डों में गॉर्डन कंप्लीट नहीं हुए हैं।

सफाई : सफाई बड़ी समस्या है। पिछले बजट में कचरा प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का वादा किया। सरकार ने सहमति दी। निगम को जमीन मिली। लेकिन उसे अब तक फाइनल नहीं किया।

निर्माण : सामुदायिक भवन, मरम्मत और अन्य निर्माण कार्याें के लिए निगम ने करीब 40 करोड़ रुपए का प्रावधान किया। इसके एवज में शासन से 8 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली। इसके काम शुरू नहीं हुए।

सड़क : शहर की अंदरूनी सड़कों का बुरा हाल है। नए सिरे से सड़क बनाने अद्योसंरचना मद से प्रावधान किया गया। करीब 150 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया। लेकिन सड़कें अब तक नहीं सुधरी।

पार्किंग : यातायात दबाव कम करने के लिए मल्टीलेवल पार्किंग बनाने की घेषणा हुई। सरकार ने इसे पीपीपी मॉडल से बनाने निगम को सुझाव दिया। इसके बाद से निगम ने प्लानिंग तक नहीं की।

पानी : पेयजल संकट को दूर करने के लिए निगम हर साल 50 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान करता है। पिछले बार इसके लिए 5 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली। समस्या से निदान अब तक नहीं मिला।

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