भारत की दोस्ती ने बदला अफगान का चेहराः करजई

hamidभारत की दोस्ती ने अफगानिस्तान का चेहरा बदला है। अफगानिस्तान को समृद्ध बनाने में भारत का बड़ा योगदान है। विपरीत परिस्थति में भारत ने अफगानिस्तान का साथ दिया है। हजारों लोग पढ़ने के लिए भारत आते हैं। अफगानिस्तान से 60 हजार छात्र-छात्राएं बीते 14 वर्ष में भारत के अंदर शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं।

वह खुद भी आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज में पढ़ने के साथ ही हिमांचल प्रदेश से डायरेक्ट्रेट की डिग्री ले चुके हैं। इसलिए अफगानिस्तान को बढ़ाने में भारत भाई की तरह खड़ा हुआ है। यह बातें आईआईटी के वार्षिक फेस्ट टेककृति-2016 शुभारंभ के मौके पर आए अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति डॉ.हामिद करजई ने कही।

आईआईटी के ओपन एयर थियेटर में डॉ.करजई हाथ हिलाते हुए दाखिल हुए। उन्होंने नमस्कार से आईआईटियन्स का इस्तकबाल किया। उन्होंने कहा कि भारत और अफगानिस्तान की दोस्ती सीमेंट की तरह मजबूत है। भारत ने अफगानिस्तान को फाइनेन्सियली काफी सपोर्ट किया है। अफगानिस्तान में जब कोई स्कूल, इंस्टीट्यूट और टूरिस्ट के लिए नहीं था उस वक्त भारत ने मदद की है। रसिया से युद्ध के वक्त भारत ने अफगानिस्तान का समर्थन किया था। ऐसे में भारत को भूला नहीं जा सकता है।

आजादी के बाद से भारत ने एजूकेशन के क्षेत्र में एक नया आयाम बनाया है। इसका भारत निर्माण में बड़ा योगदान है। एजूकेशन से ही भारत ने खुद को मजबूत करके स्थापित किया है। इसीलिए भारतीयों का डंका सभी देशों में बज रहा है। भारत ने अफगान की सभी क्षेत्रों में मदद की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अफगानिस्तान आकर वहां की संसद का शुभारंभ करके वहां के लोगों के दिलों में भारत का कद और बढ़ा दिया है। इसीलिए भारत और अफगान के सबंध निरंतर मधुर हो रहे हैं।

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