नई दिल्‍ली। कर्नाटक कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन वाली सरकार बनने के बाद से ही दोनों दलों में खींचतान जारी है। पहले दोनों दल मंत्रालयों को लेकर असहमत थे और अब बजट को लेकर तनातनी होने लगी है। कहा जा रहा है कि 2018-19 के वित्त वर्ष के लिए बजट पेश करने पर दोनों ही दल अलग-अलग राय रख रहे हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने सोमवार को दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की है।

पूर्ण बजट बनाम पूरक बजट

कर्नाटक सत्‍ता पर भाजपा को काबिज होने से रोकने वाली कांग्रेस-जेडीएस सरकार में मतभेद की खबर आती रहती है। कैबिनेट चुनाव के बाद अब बजट को लेकर दोनों के बीच विवाद है। एक ओर कांग्रेस का कहना है कि नए बजट की जरूरत नहीं बल्‍कि पूरक बजट आना चाहिए, वहीं जेडीएस का कहना है कि नई सरकार के आगे की दिशा के लिए नए बजट की जरूरत है। इससे पहले रविवार को कुमारस्वामी ने किसानों की कर्जमाफी की उनकी सरकार की योजना में 50 फीसद मदद करने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया। कर्जमाफी को लेकर कुमारस्वामी पर जबरदस्त दवाब है।

पूर्ण बजट पर सिद्दरमैया को आपत्‍ति

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस-जदएस समन्वय समिति के अध्यक्ष सिद्दरमैया ने नया पूर्ण बजट पेश करने पर गहरी आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि इस कवायद की कोई जरूरत नहीं है। कांग्रेस विधायक दल के भी नेता सिद्दरमैया ने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर वह कुछ महीने पहले ही बजट पेश कर चुके हैं। इसी वजह से उनकी सरकार ने चार महीने के लिए लेखानुदान लिया था जो जुलाई तक उपलब्ध होगा। लिहाजा पहले से जारी सभी कार्यक्रम और बजट में घोषित नए कार्यक्रम जारी रहेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को सलाह दी, अगर वह कुछ नई परियोजनाओं को शुरू और नए कार्यक्रमों की घोषणा करना चाहते हैं तो वह पूरक बजट पेश कर सकते हैं।

नई सरकार के लिए पूर्ण बजट जरूरी

उनकी इस सलाह पर दिल्ली में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा, ‘जब भी नई सरकार सत्ता में आती है तो उसे दिखाना होता है कि उसके लक्ष्य क्या हैं। लिहाजा हम खुद को पूरक बजट पेश करने तक सीमित नहीं रख सकते क्योंकि सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस-जदएस ने कई वादे किए हैं जिन्हें नए बजट में शामिल करना होगा। इन सभी को शामिल करने के लिए पूरक बजट पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने यह भी बताया कि 10 दिन के भीतर साझा न्यूनतम कार्यक्रम तय हो जाएंगे।