जांच अफसरों के मुताबिक यह सच है कि महाराज दूसरी पत्नी डॉ. आयुषी और बेटी कुहू के झगड़े में बुरी तरह फंस गए थे। उन्हें हर पल समाज में बदनामी का डर सताता रहता था। पत्नी उनकी निगरानी करने लगी थी। सेवादार और ड्राइवर से आश्रम में आने वाले दर्शनार्थियों और बैठक की जानकारी लेती थी। वह मिलने वालों और आने-जाने का हिसाब भी रखती थी। उधर, कुहू भी इस प्रयास में लगी रहती थी कि उसके पिता और पत्नी में किसी न किसी बात पर मतभेद बने रहें। इस बीच रियल इस्टेट में हुए नुकसान की वजह महाराज को अंदर ही अंदर खोखला कर रही थी।

सूत्रों के मुताबिक महाराज ने मनमीत और अमोल चव्हाण के जरिये पुणे में रियल इस्टेट में करोड़ों का निवेश किया था। नोटबंदी के बाद प्रॉपर्टी के भाव में अचानक गिरावट आई और महाराज के पास नकदी (लिक्विडिटी) की किल्लत होने लगी। बताया तो यह भी जाता है कि उन्होंने उन लोगों से मदद मांगी थी जो कभी महाराज से मिलने के लिए दिनभर उनके आश्रम में बैठे रहते थे लेकिन उन्होंने महाराज के फोन उठाना बंद कर दिए थे। महाराज को रियल इस्टेट कारोबारी और प्रसिद्ध फिल्म गायिका से भी रुपए मांगने पड़े थे।

इन्हें पता है महा’राज’

पुलिस के मुताबिक यह तो स्पष्ट हो चुका है कि भय्यू महाराज नकदी की समस्या से जूझ रहे थे। हालांकि उनके पास करोड़ों की जमीन और मकान थे। इस राज से सेवादार विनायक, अमोल चव्हाण, मनमीत अरोरा, मनोहर सोनी और शेखर वाकिफ हैं लेकिन एक भी व्यक्ति भय्यू महाराज के कारोबार, निवेश और खरीदारी की जानकारी देने को तैयार नहीं है। पुलिस सीए प्रमोद चोपड़ा, वकील राजा बड़जात्या सहित अन्य लोगों की गोपनीय जांच कर अपने स्तर पर छानबीन में जुटी हुई है।