बुंदेलखंड में एक बार फिर बर्बादी की बारिश, 24 घंटे में 5 किसानों की मौत

kisan-झांसी. बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल बर्बादी के बाद 24 घंटे में झांसी रीजन में 5 किसानों की मौत हो चुकी है। वहीं, मंगलवार को उरई में फसल बर्बादी से मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने उरई-जालौन रोड जाम कर प्रदर्शन किया। बता दें, इस समय गेहूं और सरसों की फसल खड़ी हुई थीं। बताया जा रहा है ओलावृष्टि के बाद फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। इससे पहले साल 2015 में हुई ओलावृष्टि के बाद 350 किसानों ने आत्‍महत्‍या कर ली थी।

कर्ज लेकर बोई थी फसल
थाना कोतवाली क्षेत्र के मसौराखुर्द गांव निवासी रामपाल (50) मंगलवार सुबह खेत में मटर की फसल देखने के लिए गए थे। बर्बाद फसल देख उनके सीने में दर्द हुआ और वहीं गिर गए। जिला अस्पताल ले जाने पर डॉक्‍टरों ने उन्‍हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया, रामपाल ने कर्ज लेकर फसल बोई थी।

खेत में ही कर ली आत्‍महत्‍या
दरदा छावनी निवासी दशरथ ने किराए पर खेत लेकर फसल बोई थी। उस पर 52 हजार रुपए बिजली का बिल बकाया था। बेमौसम बारिश के बाद बर्बाद फसल को देख दशरथ ने खेत में ही लगे पेड़ से फंदा डाल आत्महत्या कर ली।

कुएं में कूद दी जान
बबीना ब्‍लॉक मुरारी गांव के आजाद (35) ने डेढ़ एकड़ में फसल बोई थी। लेकिन ओलाव‍ृष्टि से पूरी फसल बर्बाद हो गई, जिसके बाद आजाद ने खेत के पास बने कुएं में कूद कर जान दे दी।

खेत में फसल देख लगा सदमा
जालौन में भदेख गांव कल्याण पाल (45) और चुर्खीवाल राजाराम कुशवाहा (65) ओलावृष्टि के बाद खेत में फसल देखने गए थे। वहां बर्बाद हुई फसल देख दोनों की खेत में ही सदमे से मौत हो गई।

पिछले साल 350 किसानों ने की थी आत्‍महत्‍या
साल 2015 के मार्च माह में ओलावृष्टि कई बार हुई थी। तब भी फसल बर्बाद हुई थी। इसके बाद चार महीने में करीब 350 किसानों ने आत्महत्याएं की थी। इसके बाद इस साल सूखा पड़ने के कारण किसान सदमे में आ गए। लगातार पड़े तीसरे और अब तक के 19वें सूखे ने किसानों को तोड़कर रख दिया। पिछले तीन महीने में यहां 300 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है।

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