नहीं रहे पीए संगमा, 26 साल कांग्रेस में रहने के बाद इसलिए छोड़ी थी पार्टी

captureनई दिल्ली. पूर्व लोकसभा स्पीकर पीए संगमा का शुक्रवार को निधन हो गया। वे 68 साल के थे। बताया जा रहा है कि हार्ट अटैक के बाद उन्हें आरएमएल हॉस्पिटल ले जाया जा रहा था। रास्ते में उनकी मौत हो गई। इस खबर के बाद लोकसभा को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया।
– लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने संगमा के निधन की जानकारी सदन को दी।
– स्पीकर ने कहा कि किस तरह हंसते हुए सदन को चलाना है, यह मैंने पीए संगमा से सीखा।
– सभी सांसदों ने 2 मिनट का मौन रखा। इसके बाद लोकसभा को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
– प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी ने कहा- “पूर्व लोकसभा स्पीकर और मेघालय के पूर्व सीएम पीए संगमा के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ। मेरी हार्दिक संवेदनाएं।”
– पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- “पीए संगमा एक सेल्फ मेड लीडर थे। नॉर्थ-ईस्ट के डेवलपमेंट में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।”
– राजनाथ ने ट्वीट कर कहा- “वे एक सम्मानित सांसद और अच्छे इंसान थे। उनका जाना दुखद है। उनकी आत्मा को शांति मिले।”
– राहुल गांधी ने कहा- “पूर्व लोकसभा स्पीकर पीए संगमा के निधन पर गहरी संवेदना। उनके निधन से देश को बड़ी क्षति हुई है।”
11वीं लोकसभा में स्पीकर थे संगमा
– 11वीं लोकसभा में स्पीकर रहे पुर्नो अगिटोक संगमा नौ बार सांसद चुने गए।
– 1 सितंबर 1947 को वेस्ट गारो हिल्स, मेघालय के चपाथी गांव में जन्मे संगमा ने शिलॉन्ग से ग्रैजुएशन किया।
– फिर असम के डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रैजुएशन और एलएलबी की।
– 1973 में संगमा मेघालय की युवा कांग्रेस समिति के प्रेसिडेंट बने।
– 1975 में मेघालय कांग्रेस के महासचिव बने।
– 1977 में पहली बार मेघालय की तुरा लोकसभा सीट से सांसद बने।
– 1988 से 1991 तक वे मेघालय के सीएम भी रहे।
– 1996 से 1998 तक लोकसभा स्पीकर थे।
– उन्होंने प्रणब मुखर्जी के खिलाफ राष्ट्रपति पद के लिए भी चुनाव लड़ा था, हालांकि वे हार गए।
– उनकी बेटी अगाथा संगमा सांसद और यूपीए-2 में मनमोहन सिंह की कैबिनेट में सबसे युवा मंत्री रही हैं।
कांग्रेस से कब हुए अलग?
– 1999 में संगमा ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया।
– इसके कारण उन्होंने कांग्रेस छोड़ी थी।
– इसके बाद उन्होंने शरद पवार और तारिक अनवर के साथ मिलकर नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी बनाई।
क्यों छोड़ा शरद पवार का साथ?

– प्रेसिडेंट इलेक्शन लड़ने के लिए संगमा ने 2013 में एनसीपी से इस्तीफा दे दिया।
– दरअसल, एनसीपी चीफ शरद पवार ने यूपीए कैंडिडेट प्रणब मुखर्जी को सपोर्ट कर दिया।
– जनवरी 2013 में उन्होंने नेशनल पीपुल्स पार्टी नाम से नई पार्टी बना ली।
– वहीं, संगमा को एनडीए का सपोर्ट मिला। हालांकि, संगमा चुनाव हार गए।
– मई, 2014 में एक बार फिर तुरा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।

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