बुराड़ी केस: अनुष्ठान का मास्टरमाइंड ललित इंटरनेट पर देखता था भूत-प्रेत से जुड़े शो

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नई दिल्ली। बुराड़ी कांड में रोज नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे भाटिया परिवार के 11 सदस्यों की मौत की गुत्थी और उलझती दिख रही है।

शुरुआती जांच में परिवार के सदस्य ललित भाटिया शक़ में घेरे में है। ललित भाटिया की अगुवाई में घऱ में वो अनुष्ठान किया गया था, जिसके बाद परिवार के दस सदस्य घर में ही फांसी के फंदे पर लटकते मिले थे। वहीं परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला की लाश दूसरे कमरे की फर्श पर मिली थी।

इंटरनेट पर भूत-प्रेत के शो देखता था ललित

पुलिस जांच में ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि ललित भाटिया यू-ट्यूब पर भूतों से जुड़े शो देखता था। इतना ही नहीं वो सोशल मीडिया पर मौत और उसके बाद आत्मा का क्या होता है, उस पर भी रिसर्च करता था। ललित के मोबाइल फोन रिकॉर्ड से ये पता चला है कि वो भूतों के शो के अलावा इंटरनेट पर परालौकिक घटनाओं से जुड़े शो भी देखता था।

दिल्ली पुलिस के डीसीपी जॉय एन तिर्की के मुताबिक, “एक जुलाई को बुराड़ी के घऱ में सामूहिक आत्महत्या करना वाले भाटिया परिवार ने इसकी तैयारी दस दिन पहले ही शुरू कर दी थी। इस मामले की जांच कर रहे क्राइम ब्रांच के अफसर भी मानते हैं ललित भाटिया और पत्नी टीना ने परिवार के सदस्यों के फांसी पर लटकने से पहले उनके हाथ-पैर बांधे थे। ऐसे में इस सामूहिक आत्महत्या के मामले में पुलिसिया जांच ललित और उसकी पत्नी के इर्द-गिर्द घूम रही है।”

इस मामले की जांच कर रहे क्राइम ब्रांच ने जो दो महीने के सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं, उसमें ललित और उसकी पत्नी की हरकतें संदेहास्पद दिख रही हैं। सामूहिक आत्महत्या से पहले ये दोनों 23 से 30 जून के बीच अनुष्ठान से जुड़ी पूजन सामग्री लाते नजर आ रहे हैं।

घटना वाली रात जोर-जोर से भौंक रहा था पालतू कुत्ता

घटना वाली रात को ललित भाटिया ही घऱ में आखिरी दाखिल होने वाला शख्स था। इससे पहले सीसीटीवी फुटेज में वो अपने पालतू कुत्ते के साथ गली में घूमता नजर आ रहा है। बाद में उस कुत्ते को घर की दूसरी मंजिल पर बांध दिया गया। पड़ोसियों ने भी पुलिस को बताया है कि आमतौर पर भाटिया परिवार अपने पालतू कुत्ते को रात में खुला छोड़ देते थे। मगर जिस दिन परिवार ने सामूहिक आत्महत्या को अंजाम दिया। उस दिन छत पर बंधा पालतू कुत्ता जोर-जोर से भौंक रहा था।

सैनिकों जैसा अनुशासन सिखाता था ललित

डीसीपी जॉय तिर्की के मुताबिक, “अपने मरहूम पिता गोपालदास, जोकि आर्मी में थे। ललित उनकी तरह परिवार के सदस्यों को अनुशासन, नियमों का पाठ पढ़ाता था। वहीं अनुष्ठान के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना है, उसकी भी जानकारी देता था। घऱ से जब्त हुए एक रजिस्टर में ये जानकारी मिली है। वहीं ललित परिवार के सदस्यों को सुबह की प्रार्थना के बाद सैनिकों की तरह खड़े रहने की निर्देश भी देता था।”

रजिस्टर में दर्ज करता था अनुष्ठान की जानकारी

ललित पिछले दिन की सभी घटनाओं को एक रजिस्टर में दर्ज करता था। वहीं परिवार के सदस्यों को जो भी निर्देश देता था, उसकी जानकारी भी उस रजिस्टर में दर्ज होती थी।

ये पता लगाने की कोशिश में कि आत्महत्या से पहले परिवार ने ऐसा खाना तो नहीं खाया था, जिसमें नींद की गोलियां मिली थीं। पुलिस ने जांच के लिए विसरा भेजा है। जिसकी रिपोर्ट दस से 15 दिन में मिल जाएगी। इसके आने के बाद इस राज पर से पर्दा उठ पाएगा।

इसके अलावा पुलिस पैरानॉर्मल एक्सपर्ट की भी मदद लेने का मन बना रही है, क्योंकि शुरुआती जांच मे पुलिस को ये मामला शेयर्ड सायकोटिक डिसऑर्डर का लग रहा है।

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