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TCS-Infosys ने 700 करोड़ की जमीन 46 करोड़ में ली, लेकिन नहीं दी नौकरियां

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धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने आठ साल पहले देश की दो नामी सॉफ्टवेयर कंपनियों टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस) और इंफोसिस को प्रदेश में रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश के इंदौर में 230 एकड़ जमीन दी। कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से वर्ष 2011 में इसकी कीमत 699 करोड़ रुपए थी लेकिन आईटी नीति के तहत कंपनियों को रियायती दर पर 20 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से जमीन दी गई।

जमीन इस शर्त के साथ दी गई कि कंपनियां प्रति एकड़ 100 इंजीनियरों को नौकरी देंगी। इनमें से पचास फीसदी मध्य प्रदेश के स्थायी निवासी होना चाहिए थे पर हकीकत ये है कि कंपनियां वादे भूल गईं। न तो अब तक पूरी तरह कंपनियों का काम शुरू हुआ है और न ही वादे के मुताबिक नौकरियां दी गईं।

इस बारे में कंपनी का पक्ष जानने के लिए कई शीर्ष लोगों से बातचीत की गई लेकिन उन्होंने मीडिया के साथ बात करने के लिए अधिकृत न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। सीईओ स्तर के एक अफसर ने यह जरूर कहा कि यह सवाल तो आईटी विभाग से किया जाना चाहिए।

मप्र के 11500 इंजीनियरों को मिलना थी नौकरी

28 दिसंबर 2011 को कैबिनेट ने इंदौर की सुपर कॉरिडोर पर आईटी कंपनी टीसीएस-इंफोसिस को सौ-सौ एकड़ जमीन रियायती दर पर देने का फैसला किया था। बाद में इंफोसिस को 30 एकड़ जमीन और दी गई। आईटी विभाग के साथ कंपनियों का जो एमओयू हुआ था, उसके मुताबिक कंपनियों को 23 हजार इंजीनियरों को नौकरी देना था। मप्र के स्थायी निवासी इंजीनियरों को आधी यानी 11500 नौकरियां देने की अनिवार्य शर्त थी। अक्टूबर 2017 तक पूरी तौर पर इन कंपनियों को काम शुरू करना था पर हकीकत ये है कि कंपनियां चंद कर्मचारियों के सहारे चल रही हैं।

इनका कहना है

कंपनियों को जमीन सरकार ने दी थी। दोनों को जिस स्केल पर शुरू होना था, अब तक नहीं हो पाई हैं। एक्सपोर्ट तो शुरू कर दिया है। रोजगार सेक्टर में काम बाकी है पर उसमें हमारी भूमिका नहीं है, इस बारे में कंपनियों का एमओयू आईटी डिपार्टमेंट के साथ हुआ था।

कुमार पुरुषोत्तम, एमडी,एकेवीएन (औद्योगिक क्षेत्र विकास निगम), इंदौर

कंपनियों ने अनुबंध किया था तो उसको पूरा करना उनकी जवाबदारी है। पूरा मामला अभी मेरी जानकारी में नहीं है लेकिन मंगलवार को मैं इसकी फाइल बुलाकर समीक्षा करूंगा और जो भी शर्त थी उसका पालन सुनिश्चित कराएंगे।- उमाशंकर गुप्ता, मंत्री, आईटी

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